Monsoon Management
मॉनसून के समय का मैनेजमेंट।
मानसून का समय जून के अंत से लेकर अगस्त के महीने तक होता है। अधिकांश भारत में आंधी और गरज के साथ बारिश होती है। इस समय हवा में नमी की मात्रा अधिकतम और तापमान के उतार - चढ़ाव का बर्ड को सामना करना पड़ता है। इस कारण बर्ड में स्ट्रेस का बढ़ जाना और उत्पादन में कमी हो जाना है। यह समय जीवाणु (Bacteria) , विषाणु (Virus) , फंगस ( Fungus) , मक्खी और मच्छर के पनपने का होता है। इन सब से बचने के लिए फार्म पर निम्नलिखित उचित व्यवस्था करना जरूरी है।
फार्म का रख रखाब।
1 . शेड की छत से बारिश के पानी के रिसाब की जाँच कर लीजिये।
2. बारिश के पानी को फार्म से बाहर निकालने वाली पाइप को साफ़ कर लीजिये और शेड के आस पास पानी इकट्ठा नहीं हो।
3. तेज बारिश और आंधी की परिस्थिति में शेड को गिला होने से बचने के लिए पर्दे की जाँच और स्थान सुनिश्चित करें।
4. पर्दे के ऊपर एक से दो फुट जगह छोड़ दें जिस से शेड में साफ़ हवा का आना और गैस का बाहर जाना बन जाये।
5. शेड के आस पास मक्खी मच्छर को पनपने से रोकने के लिए घास व झाड़ियों को कटवा दें।
6. शेड के बाहर फ़ॉर्मूलिन (Formalin) का स्प्रे और चुना 1 Kg / 100 Sq. Ft , ब्लीचिंग पाउडर (200 gm/100 Sq. ft मिक्स कर छिड़काव कर दीजिये।
पानी की व्यवस्था।
1. बारिश के मौसम में पानी की गुणवत्ता में कमी आने के कारन इसकी जाँच करवाना जरूरी है।
2. पानी साफ़ , स्वच्छ और मीठा होना चाहिए। पानी का खारा ( Hard) होना मुर्गी के लिए सही नहीं है।
3. पानी में जीवाणु जैसे ई – कोलाई ( E- coli , Salmonella ) और साल्मोनेला की जाँच किसी लैब से करवा लेनी चाहिए।
4. पानी की पी एच् वैल्यू ( PH) और खारे की जाँच बर्ड डालने से पहले करवा लें।
5. पानी का पी एच् 6 . 00 तक फार्म के लिए उपयुक्त है। यदि फार्म में ई -कोलाई की शिकायत है तो पानी में Ayucid -PH जो की एक असिडिफाइर Acidifier है और पानी के पी एच को कम कर के बीमारी को कंट्रोल करता है।
6. पानी के बर्तन रोज़ और पाईप को शुरू में साफ़ करें।
7. पानी का ORP ( Oxidation Reduction Potential ) लेवल > 650 m V में अच्छा माना जाता है।
8. ई - कोलाई की शिकायत पर 15 दिन में एक बार पाइपलाइन की सफाई हाइड्रोजन पेरोक्साइड ( H2O2) से करें।
लिटर ( Litter) मैनजमेंट
1. लिटर अच्छी गुणवत्ता और सूखा जिसमें नमी की मात्रा बीस प्रतिशत से कम होनी चाहिए।
2. लिटर को फार्म में बिछाने के बाद बचे हुए लिटर को साफ़ जगह पर रख दें।
3. लिटर पर CuSo4 ( Copper Sulphate) 20 ग्राम / 1 लीटर पर मिला कर स्प्रे कर दें।
4. लिटर को जमने से बचाने के लिए समय पर खोदी लगाते रहें। यदि नीचे लिटर ज्यादा गिला हो तो चुना मिलाएं।
5. बर्ड की बीठ को भी समय पर निकालते रहें। किसी भी डिसइंफेक्टेंट ( Disinfectant) का स्प्रे करें। यह काम सुबह या शाम को करें।
